Thursday, June 2, 2016

काकू की कहानी

सुबह का समय था। चाँद छिप चुका था लेकिन सूर्योदय अभी तक नहीं हुआ था। काकू गहरी नींद में था। वो एक सपने में खोया हुआ था। काकू को बहुत जोर का पेशाब लगा। उसे अपने सपने में भी उतनी ही जोर का पेशाब लगा। काकू पेशाब करने नहीं उठा। उसने सोचा कि सपने में ही लगा है।

सपने में वो जगह ढूंढने लगा जहाँ वो हल्का हो सके। एक जगह मिल गई और उसने कर दिया। अभी काकू को हल्का गरम सा कुछ महसूस हुआ। काकू की नींद टूट गई। बस इस तरह काकू हर रोज बिस्तर गीला कर देता है।

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