Wednesday, May 4, 2016

बातों बातों में...

  1. सकारात्मक सोच होनी चाहिए, लेकिन ऐसी भी क्या कि सही गलत का फर्क ही ना दिखाई पड़े।
  2. सभी समझाते है कि ऐसा वैसा मत बोला कर उसे बुरा लगेगा, कोई ये नहीं समझाता कि बुरा मत माना कर उसने ऐसे ही कहा है।
  3. शायद ख़ुशी और दुःख से बढ़कर भी एक चीज होती है.... तसल्ली।
  4. जब अपनी सोच का प्रतिबिम्ब किसी कविता में झलकता है, तो अपने आप पर गर्व महसूस होता है।
  5. अभी कुछ ऐसे मोड़ पर है जिंदगी, कि समझदार भी हो गए और बचपना भी नहीं गया।
  6. उम्मीद, दूसरों से हो तो कमज़ोरी है और अग़र खुद से हो तो ताकत है।

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