Friday, January 22, 2016

बीड़ी का बण्डल

"ओये लपरु!!!!"

"हाँ झपरू!!!"

"यार, आज तो मौज ही हो गयी। "

"हाँ यार, पुरे तीन सौ रुपये दिहाड़ी मिली है।"

"बहुत दिन हो गए, बच्चे कब से मिठाई की जिद्द कर रहे हैं।"

"तेरी भाभी भी कब से कान की बालियां लेना चाह रही थी।"

"मेरी गुड़िया को नया कैदा भी लेकर देना है।"

"आज बच्चों को उनकी पसंद की सब्जी खिलाऊंगा।"

शाम को,

"तुम लोगों की होली की उधारी अभी तक बाकी है, आज तो दे दो। लपरु भाई, तुम्हारी तरफ दो सौ सत्तासी और झपरू भाई तुम्हारी तरफ दो सौ इक्यानवे रुपये आते है।"

"ये लो भैया, और सौ ग्राम प्याज दे देना।"

"और कुछ चाहिए तुम लोगों को?"

"एक बीड़ी का बण्डल दे दो भैया।"

घर जाकर :

"भाग्यवान, चटनी में प्याज भी डालना। आज दिवाली मिली है।"

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