Saturday, February 22, 2014

ख़त

नजरों के इशारों से उसको समझाया था,
किताब में उसकी मैंने एक ख़त छुपाया था|

टूट कर बिखरे पड़े थे पत्ते उस गुलाब के,
चूमकर जिसे उसी ख़त के नीचे दबाया था|

वो आये ही नहीं मेरी खैर खबर जानने को,
बीमार पड़े है हम उसकी सहेली से कहलाया था|

तुम धरती मैं आसमां, अपना मिलन है मुश्किल,
मेरे ख़त के जवाब में ख़त उनका आया था|

1 comment:

  1. भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने...

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