Friday, November 22, 2013

भिखारी

“अल्लाह के नाम पे कुछ दे दो” – भिखारी ने आवाज लगाई |
मैंने कहा – “भीख मांगते हुए तुझे शर्म नही आई |”

वो बोला –
“भगवान् मेरा पेट भर रहा है, इससे मुझे कोई परेशानी नही है,
तो तुझे क्या तकलीफ है भाई |
कुछ देना है तो दे दे, वर्ना मेरी जान मत खा कसाई |”

मैंने पूछा – “सरकार तुम्हे कुछ नहीं देती है क्या?”
वो बोला – “तुम्हे देकर भी तुम्हारे पल्ले कुछ रहने देती है क्या |”

मैं बोला - “कहना तो तुम्हारा सही है, तुम जैसे और भी कई है,
तुम मिलकर सरकार से बात करो, देश पर हक़ तुम्हारा भी है |”

वो बोला - “हम ना हिन्दू है, ना मुस्लिम है और न ईसाई,
हम तो भीख मांगने वाले भिखारी है भाई |
आपस में हम लड़ते नहीं है, बुरा किसी का सोचते नहीं है |
हमें अपनी दुनिया में रहने दे, कुछ देना है
तो दे वर्ना मुझे जाने दे |”

मैंने अपनी राह ली उसको दो रूपये देकर,

“भगवान् तुम्हारा भला करे”, चला गया वो कहकर |

2 comments:

  1. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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  2. वाह ..
    बहुत ही अच्छी रचना..
    :-)

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आपकी टिप्पणी के लिए धन्यवाद!!!!