Friday, October 25, 2013

आज भी है


इस उम्मीद से मेरा घर रोशन आज भी है,
तुझे छुप छुप के देखने का मन आज भी है |

तुझको घर की चारदीवारी प्यारी है बहोत,
और यहाँ बारिश का मौसम आज भी है |

तूफानों से अक्सर शर्त लगाता हूँ मैं,
इन हवाओं में जिन्दा तेरा असर आज भी है |

है इरादा के छीन लूँ तुझे दुनिया से,
पर मेरी मोहब्बत से बेखबर तू आज भी है |

2 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर रचना...
    है इरादा कि तुझे ...
    ........मेरी मोहब्बत से बेखबर तू आज भी है..
    बेहतरीन पंक्ति ...
    :-)

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  2. खुबसूरत अभिवयक्ति......

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