Saturday, September 7, 2013

महंगाई

लेखक बनने की इच्छा है । जितना हो सके उतना लिखना चाहता हूँ । आज पहली बार लिख रहा हूँ।

क्या लिखूँ आज ????

चलो महंगाई पे लिख देते है । जिस हिसाब से महंगाई बढ़ रही है, इसके ऊपर कितना ही लिख लो, कम है ।

सुबह सुबह गया प्याज लेने, क्या बताऊँ समझ ही आया की हँसने की बात है या रोने की । एक तो 100 ग्राम में एक ही प्याज ऊपर से वो भी 8 रूपये का । अब भाई पहले के लोग सलाद के साथ गुजारा करते थे, और आज सलाद का नाम लेते ही आखों में पानी आ जाता है ।

महंगाई ने तो कमर तोड़ दी जनाब । लोगों के घुटने तक दे गए जवाब ।

गोलगप्पे (पानी पूरी) भी 10 के 3 हो गए है । कभी अगर 10 के 5 खाने को मिल जाएँ तो रेहड़ी वाले को दुआएं बहुत देते है । अजी अब तो किसी अच्छी दुकान में कुछ खाने से कतराते हैं। एक बार जाते ही जेब खाली हो जाती है।

बताइये, पानी तक भी बिकने लगा है।  पहले हर जगह प्याऊ होते थे, आजकल बहुत कम रह गए हैं। और जो है उनकी कोई देखभाल नहीं करता।

देश का बंटाधार हो गया, और वो पैसे खाके पार हो गया।

और अंत में :

प्याज और पेट्रोल दोनों की समस्या आजकल सबको खा गयी, ओह जी देखिये भारत मे महंगाई आ गयी । 

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