Wednesday, September 11, 2013

तुम ही

तुम ही साँसें, तुम ही धड़कन, तुम ही हो मेरी परछाई,
तुम ही हो पुष्प, तुम ही खुशबू, तुम ही ने ज़िंदगी महकाई,

मैं जब भी मुसकुराता हूँ, तेरा ख्याल आता है,
मैं जब तेरा नाम लेता हूँ, वक़्त ये थम सा जाता है।
मैं खुद को जब निहारू तो, तेरा चेहरा नजर आए,
मेरी हर साँस में तेरी यादों का पैगाम आता है।

तुम ही आखें, तुम ही सपना, तुम ही मन में हो समाई,
तुम ही साँसे, तुम ही धड़कन, तुम ही हो मेरी परछाई।

जमीं पे घर हो अपना, आसमाँ पर चौबारा हो,
अंजानों की तरह ही, मिलन अपना दोबारा हो।
बन के परिंदे हम, अंबर मे उड़ाने ले,
चन्दा और सितारों से एक रिश्ता हमारा हो।

चाहे इक दूजे को हम हद्द से गुजर जाएँ,
हमारे बाद भी जीवित ये किस्सा हमारा हो।

तुम ही मेरा ख्वाब, तुम ही चाहत, तुम ही यादों की गहराई,
तुम ही साँसें, तुम ही धड़कन, तुम ही हो मेरी परछाई।

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