Saturday, May 11, 2013

माँ

मैं सोता हूँ देर तक क्योंकि माँ मुझको जगाती है
मैं पागल हूँ क्योंकि माँ मेरी इन्ही हरकतों पे मुस्कुराती है

है मन में लाखों परेशानी फिर भी प्यार से रहती है
माँ छोटी छोटी बातों पे मुझको हंसाती है

बचपन में की हुई थी जो हमने शैतानिया
बचपन लौट आता है जब माँ हमको बताती है

वो दिन याद आते है जब माँ की गोद में सोते थे
लोरियां जब भी मेरी माँ गुनगुनाती है

1 comment:

  1. बहुत ही सुन्दर प्यारी रचना..
    :-)

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