Tuesday, March 13, 2012

ख्वाबोँ की परी

ख्यालोँ मेँ करता हूँ बातेँ जिससे मैँ हर घङी
कैसे करू बयाँ वो मेरे ख्वाबोँ की परी

हर धङकन से पहले जिसका अहसास है
नजरो से दूर पर दिल के वो पास है







चाहत जिसे पाने की है जिसका इंतजार मुझे
दिल का हाल मैँ कह दूँगा पहली ही मुलाकात मेँ

एक हलचल मन मेँ उठती है क्या हाथ मेरा वो थामेगी
मेरे प्यार को समझ कर क्या अपना मुझको मानेगी

क्या बन पायेगा ये सपना हकीकत कभी
कैसे करु बयाँ वो मेरे ख्वाबोँ की परी

3 comments:

  1. बहूत खुबसुरत खयाल है..
    और उतनी हि सुंदर रचना...

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  2. very beautiful :) jald hi milegi tumhe khwabo ki pari :)

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  3. बहुत सुन्दर.....
    सपना ज़रूर होगा पूरा...
    :-)

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