Sunday, February 5, 2012

बारिश

तेज हवा मेँ बारिश की बुँदो ने चेहरे को यूँ छुआ
इतना प्यारा अहसास था मैँ सब कुछ भूल गया

याद आ गया बचपन जब बारिश के हम राजा थे
पानी से भरी गलियोँ मेँ दौङ लगाते थे

पुरानी कापी के पन्नो से किश्ती बनाकर
इक दूजे से रेस हम लगाते थे

हर रोज बारिश का इतजांर करते थे
घरवालो की डांट से बिलकुल नहीँ डरते थे

आज तो छतरी लेकर बारिश मेँ निकलते है
बचपन वाले मजे एसे थोडी मिलते है

4 comments:

  1. बहुत ही गहरे और सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....

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  2. सच ही तो है बचपन वाले मज़े ऐसे ही थोड़ी न मिलते हैं तभी तो शायद बचपन अनमोल होता है जवानी से भी ज्यादा...सुंदर भाव संयोजन ... समय मिले कभी तो ज़रूर आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है http://mhare-anubhav.blogspot.com/

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  3. प्यारी कविता ...सबसे अच्छा होता बचपन....

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  4. सही कहा आपने ,,
    बहुत ही सुन्दर रचना:-)

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आपकी टिप्पणी के लिए धन्यवाद!!!!