Sunday, January 29, 2012

गोलमाल

दुनिया मेँ हर तरफ कितना गोलमाल है
नजरे घुमा के देखो बस झोलझाल है


काला हो दाल मेँ या नेता की सीधी चाल मेँ
किसी अनजान की मुस्कुराहट मेँ या अचानक कोई आहट मेँ
कोई प्यार से दो बात कर ले तो भी साला गोलमाल है

हो जाये कोई अमीर उसको खाने की फुरसत नहीँ
जिसके पास फुरसत है उसके पास खाने को कुछ नहीँ
नेता कोई मर जाये तो सरकारी अस्पताल की भी छुट्टी होती है
पीछे से मरीज है जो परेशानी तो उनको ही होती है

सरकारी स्कूल मेँ देखो कई अध्यापक नशा करते है
सारी दुनिया वाले पैसे पे ही क्योँ मरते है


पैसे के लिये इतना बवाल है
दुनिया मेँ हर तरफ गोलमाल ही गोलमाल है

4 comments:

  1. सच है...
    गोलमाल है तो सही...
    मगर आपने बात सीधी कही..

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  2. सच में सुमित जी
    आज की इस दुनिया में बहुत गोलमाल है
    हर बात में कुछ तो बात है ...वो गोलमाल है
    बेहतरीन रचना

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  3. सुन्दर प्रस्तुति...

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